UFO देखे जाने की 10 प्राचीनतम घटनाएं (10 Oldest incident of UFO seeing)

10 Oldest incident of UFO seeing in Hindi
 1870 में मिट वाशिंगटन द्वारा न्यू हैंपशायर में बनाई गई इस तस्वीर को एलियंस की मौजूदगी बताने वाली पहली तस्वीर के तौर पर मान्यता मिली हुई है। इस फोटो को 2002 में ईबे पर नीलामी के लिए उतारा गया, जहां इसे सैमुएल एम शेरमन ने ऊंचे दाम पर खरीदा। सैमुएल एम शेरमन इंटरनेशनल पिक्चर्स कॉर्पोरेशन के प्रेसीडेंट थे। ये तस्वीर वास्तव में स्टीरियो फोटोग्राफ है। दरअसल, उस समय हवाई जहाज तक का आविष्कार नहीं हुआ था।
10 Oldest incident of UFO seeing in Hindi : क्या इस ब्रह्माण्ड में पृथ्वी के अलावा और कई भी जीवों का अस्तित्व है या नहीं? यह प्रशन हमेशा से ही इंसान को आकर्षित करता आया है। समय समय पर दूसरे ग्रहों पर प्राणियों के रहने के संकेत मिले हैं। ऐसा अब वैज्ञानिक भी मानने लगे हैं कि संसार में पृथ्वी के अलावा भी दूसरे ग्रहों पर जीवों यानि एलियंस के मिलने के संकेत मिले हैं। हालांकि पक्के तौर पर अभी तब सबूत नहीं जुटाए जा सके हैं। पर एलियंस अपनी मौजूदगी के संकेत हमेशा से देते रहे हैं। आज हम आपको अपनी इस पेशकश में एलियंस की मौजूदगी के 10 सबसे पुरानी तस्वीरों को दिखा रहा है।
10 Ancient incident of UFO seeing in Hindi
1927 को ओरेगोन के केव जंक्शन में ये तस्वीर खींची गई थी। इस तस्वीर को 1926 में खींचा गया, या 1927 में, इसपर विवाद है। इसे एक दमकलकर्मी ने खींचा था।
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अप्रैल 1929 में कोलोरोडो के वार्ड सॉमिल में एडवर्ड लाइन द्वारा ये तस्वीर खींची गई थी। तस्वीर खींचने के सालों बाद एडवर्ड लाइन की बेटी ने बताया कि जब मैं 6 साल की थी, तब मेरे पिता ने 1929 में ये तस्वीर खींची थी। उन्होंने इसे बेहद डरावना करार दिया था।
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1932 को ओहियो के सेंट पेरिस में ये तस्वीर खींची गई थी। मिड डे के नजदीक जॉर्ज सुट्टन ने मई 1932 में ये तस्वीर खींची थी। इस तस्वीर में व्यक्ति के पीछे अपरिचित चीज दिख रही है। इस तस्वीर के मालिक का कहना है कि उस समय कोई स्ट्रीट लाइट नहीं होती थी, इसलिए ऐसी किसी भी चीज की पहचान नहीं हो सकी। उन्होंने दावे के साथ कहा कि ये उड़नतस्तरी है।
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7 जुलाई 1947 को एरिजोना के फ्यूनिक्स में विलियम होड्स ने सूर्यास्त के समय आसमान में कुछ चीजें उड़ती देखी और उसकी दो तस्वीरें खींच ली। इस तस्वीर में डिस्क जैसी चीज नजर आ रही थी। इन तस्वीरों को जांच के बाद असली पाया गया। बाद में इसे ‘रोजवेल यूएफओ’ का नाम दिया गया।
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1947 को स्कॉटलैंड में ये तस्वीर खींची गई थी। साफतौर पर उड़ते जहाज की ये तस्वीर स्कॉटलैंड के बाहरी हेब्रिड्स में खींची गई। इस तस्वीर में दिख रहे एयरक्राफ्ट की अभी तक पहचान नहीं हो पाई। दो तल के विमान वाली इस तस्वीर की वास्तविकता अबतक कोई नहीं समझ पाया।
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कैलिफोर्निया में 1951 में बी. मार्क्वांड नाम के व्यक्ति ने इस तस्वीर को खींचा था। 23 नवंबर 1951 को कैलिफोर्निया में खींची गई इस तस्वीर का मालिक अमेरिकी सेना में तैनात था। इस तस्वीर के 4 दिन बाद ही उसने ठीक वैसी ही एक और तस्वीर खींची। बी. मार्क्वांड की उम्र मौजूदा समय में 88 वर्ष है।
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वाशिंगटन डीसी में 1952 में खींची गई इस तस्वीर से अमेरिका में एएफओ को लेकर नई बहस शुरु हो गई। ऐसी उड़नतस्तरियां न सिर्फ व्हाइट हाउस के ऊपर देखी गईं, बल्कि पेंटागन में भी देखी गई। सरकारी एजेंसियों को शुरु में लगा कि ये किसी विदेशी दुश्मन के लड़ाकू विमान हैं, पर बाद में काफी जांच के बाद इसे यूएफओ माना गया। ये उड़नतस्तरियां 19 जुलाई 1952 को वाशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट और एंड्र्यू एयरफोर्स बेस के रडार पर भी देखी गई।
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1967 को इटली की राजधानी रोम में ये तस्वीर खींची गई। 18 जुलाई 1967 को सुबह 10 बजे ये तस्वीर खींचने वाले ड्र्यूर राइट नाम के व्यक्ति ने कहा कि रेड वाइन के नशे में था। फिर भी मैंने ये तस्वीर खींच ली। शुरु में मुझे लगा कि ये सिर्फ मेरा भ्रम है, पर तस्वीर देखने के बाद मैंने उसे अधिकारियों को सौंपने का निर्णय लिया।
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1967 में मूनसॉकेट में खींची गई ये तस्वीर उड़नतस्तरी की मौजूदगी को साफ बयांन करती है। इसे यूएफओ माना जा रहा है। इसे पहले तो फर्जी माना गया, पर बाद में पता चला कि एक दिमागी रूप से कमजोर व्यक्ति दूसरे ग्रह के प्राणियों के संपर्क में है। जिसने टेलीफोन से उनतक संकेत भेजे

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