मैसूर राजवंश- एक श्राप के कारण पिछले 550 सालों से पैदा नहीं हुआ कोई बेटा

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Mysore dynasty curse story in Hindi : सुनने में यह फ़िल्मी लग सकता है लेकिन कर्नाटक के मैसूर राजवंश में पिछले 550 सालों से कोई बेटा पैदा नहीं हुआ है और इसका कारण बताया जाता है एक रानी का राजवंश को दिया गया श्राप। आइए जानते है क्या है पूरी कहानी –
अभिशाप के साए में है राज परिवार
1612 में वाडेयार ने विजयनगर एम्पायर के महाराजा तिरुमलराजा को हराकर मैसूर में यदु राजवंश की स्थापना की। तब तिरुमलराजा की पत्नी रानी अलमेलम्मा गहने लेकर जंगल में छिप गई, लेकिन वाडेयार के सैनिकों ने उन्हें ढूंढ निकाला। खुद को चारों तरफ से घिरा देख रानी कावेरी नदी में कूद गईं। कहा जाता है कि नदी में डूबते वक्त रानी ने श्राप दिया- ‘जिसने मेरा नाश किया है उस वंश में अब कोई उत्तराधिकारी पैदा नहीं होगा।’ तब से कभी वाडेयार राजा-रानी को पुत्र नहीं हुआ। यह सिलसिला पिछले तकरीबन 550 सालों से चला आ जारा है। राजवंश की महारानियों को राज परिवार के किसी मेंबर को वारिस के तौर पर गोद लेना होता है।
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मैसूर को इस बार मिला नया राजा?
23 साल के यदुवीर राज कृष्णदत्ता को वाडेयार वंश की परंपरा के मुताबिक राजा बनाया गया है। उन्होंने पहली बार मैसूर पैलेस में शाही दरबार लगाकर यदुवंशी वाडेयार राजघराने के अपने पुरखों की 500 साल पुरानी विरासत को आगे बढ़ाया। श्रीकांतदत्ता नर्सिम्हाराजा वाडेयार की मौत के बाद उनकी पत्नी महारानी प्रमोदा देवी ने यदुवीर को गोद लिया था।

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