हेवंस गेट मास सुसाइड- जब 38 लोगों ने एक विक्षिप्त धर्म गुरु के कहने पर की आत्महत्या

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हेवंस गेट पंथ का लोगो


मार्शल हर्फ एपलव्हाइट जूनियर का जन्म मई 12, 1931 को अमेरिका में हुआ था। अपनी पढाई पूरी करने के बाद इन्होने अमेरिकन आर्मी ज्वाइन की लेकिन उनका यहाँ मन नहीं लगा।  इसलिए उन्होंने सेना की नौकरी छोड़ कर यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा में संगीत टीचर की नौकरी कर ली। लेकिन उन्होंने यहाँ पर अपने एक छात्र के साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए, जिसके बाद उन्हें उनकी नौकरी से हटा दिया गया तथा उनकी पत्नी ने भी उन्हें छोड़ दिया। इसके कुछ समय पश्चात उनके पिता  मृत्यु हो गई। अपने पिता की मौत का एपलव्हाइट के दिमाग पर बुरा असर हुआ और वो डिप्रेशन में रहने लगे।
इसी दौरान उनकी मुलाक़ात बोनी नेटल्स नाम की एक नर्स से हुई। दोनों का झुकाव रहस्यवाद जैसे विषयों पर था इसलिए दोनों ने खुद को दैवीय दूत बनने का निर्णय कर लिया। दोनों ने मिलकर पहले एक बुकस्टोर और शिक्षण संस्थान खोला लेकिन उनका यह प्रयास पूरी तरह असफल रहा।  इस हार के बाद वर्ष 1973 में एपलव्हाइट और नेटल्स अमेरिका की यात्रा पर गए ताकि वह अपने विचारों को प्रसारित कर अपने अनुयायी बना सकें।  लेकिन शुरू के 2 सालो में उन्हें कोई ख़ास सफलता नहीं मिली और वो मात्र एक अनुयायी बना सके।
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 एपलव्हाइट
 लेकिन धीरे-धीरे वो लोगों को अपने पंथ की और मोड़ने में सफल रहे। एपलव्हाइट खुद को जीसस क्राइस्ट का अवतार समझते थे और उसी तरह दुनिया के सामने खुद को पेश करते थे। मार्शल हर्फ एपलव्हाइट ने लोगों को सम्मोहित करने में महारथ हासिल कर ली थी जिससे वो अपने अनुयायियों को यह बात मानने के लिए मजबूर कर दिया था कि पृथ्वी पर बहुत जल्द ही एलियन्स का हमला होने वाला है और यदि वो स्वर्ग जाना चाहते है तो उन्हें इस हमले से पहले इस धरती को छोड़कर जाना होगा। एपलव्हाइट का कहना था कि सेक्स, पैसा और अन्य भौतिक सुख-सुविधाओं को त्यागकर ही कोई व्यक्ति जीवन के दूसरे चरण तक पहुंच सकता है इसलिए अपने 6 अन्य पुरुष अनुयायियों के साथ वह मैक्सिको गए और वहां जाकर कास्ट्रेशन (नपुंसक) करवाया ताकि उनका मन सेक्स में नहीं भटके।
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 आश्रम में सारे शव इसी हालत में मिले थे
 अपने पिता की मौत से डिप्रेशन में आये एपलव्हाइट की मानसिक स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही थी। उन्हें यह लगने लगा था की जल्दी ही इस धरती पर एलियंस का आक्रमण होने वाला है। उन्होंने अपने अनुयाइयों को हेल बॉप कॉमेट (धूमकेतु) की एक तस्वीर को दिखाकर यह समझाया की एलियंस एक स्पेसशिप में बैठकर धरती की और निकल चुके है और जल्दी ही पृथ्वी पर आक्रमण करके उसे नष्ट कर देंगे। यदि हम सबको जीसस के पास स्वर्ग में जाना है तो हमें उनके आने से पूर्व ही मृत्यु को गले लगाना पड़ेगा। इस तरह उन्होंने अपने 38 भक्तों को अपने साथ आत्महत्या करने के लिए राज़ी कर लिया।
 Heaven's Gate Mass suicide : History in Hindi
 आश्रम के एक कमरे में पड़े शव
२६ मार्च, 1997 के दिन  एपलव्हाइट ने अपने चुने हुए अनुयायियों को सेन डियागो, कैलिफोर्निया स्थित अपने आश्रम में बुलाया। और सभी 39 लोगों ने एक साथ सुसाइड कर लिया। बाद में सूचना मिलने पर पुलिस जब वहां पहुंची तो पुलिस ने उस आश्रम से 39 शव बरामद किए। सभी लोगों ने एक जैसे कपडे (जो की उनके पंथ ड्रेस कोड था) पहन रखे थे।  सभी शव बिस्तरों के ऊपर थे और सभी शवों के ऊपर बैंगनी रंग का कपडा ढका हुआ था। 1980 में इस घटना के ऊपर हॉलीवुड में Heaven’s Gate के नाम से एक फिल्म बन चुकी है।
Heaven's Gate Mass suicide : History in Hindi
आश्रम से शवों को बाहर निकालती पुलिस
कहानी यही खत्म नहीं होती है। सबसे मज़े की बात यह है की यह पंथ आज भी ज़िंदा है। हज़ारों की संख्या में इसके अनुयायी है जो यह विश्वास करते है की एलियन इस धरती को नष्ट कर देंगे।  और अधिक जानकारी के लिए आप इनकी अधिकृत वेबसाइट heavensgate.com पर पढ़ सकते है।


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