प्राचीन विशव में इन 10 क्रूरतम तरीकों से दी जाती थी नरबलि

Ancient Methods of Human Sacrifice (Narbali) in Hindi : नरबलि प्राचीन विशव की हर सभ्यता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। हालांकि नरबलि देने के कारण अलग-अलग होते थे। कहीं नरबलि धर्म के नाम पर दी जाती थी तो कही सम्मान के नाम पर, कही पुरुषों की बलि दी जाती थी तो कहीं महिलाओं और बच्चों की। सभी प्राचीन समुदायों में ‘आजटेक्स’ समुदाय में बलि देने के सबसे क्रूरतम तरीके थे जैसे की जिन्दा इंसान का दिल निकालकर सूर्य देवता को अर्पित करना, देवताओं को ज़िंदा बच्चों और महिलाओं की चमड़ी उतारकर अर्पित करना। आइए आपको रूबरू करवाते हैं कुछ ऐसे ही बलि देने के विचित्र तरीकों से जिन्हें जानकर आपका दिल भी दहल जाएगा।
1- फोइनिसियन और कार्थेगिनियन सभ्यता में बच्चों की बलि (Child Sacrifices in Carthage and Beyond)
 Ancient Methods of Human Sacrifice (Narbali) in Hindi
फोइनिसियन और कार्थेगिनियन सभ्यता के लोग धर्म के अनुसार अपने बच्चों की बलि देते थे। यह उस समय की सबसे बुरी बलि मानी जाती थी और अपने समाज को बचाने का सबसे अच्छा तरीका भी। फोइनिसियन की बलि देने की जगह को ‘टाफेथ’ (भूनने की जगह) के नाम से जाना जाता था और बलियों के रूप में दिया जाने वाला यह प्रसाद ‘मुल्क’ कहा जाता था।
कार्थेगिनियन सभ्यता की डायोडोरस सिक्युलस मान्यता के अनुसार, वहां उनके शहर में कोरोनस की एक कांसे की मूर्ति थी, जिसने अपने हाथ आगे की ओर फैलाए हुए थे और एक ढलान पर स्थित थी। जैसे ही किसी बच्चे को उसमें रखा जाता था वह बच्चा लुढ़क कर एक गढ्ढेनुमा और आग से भरी हुई जगह में चला जाता था।
2- सम्मान के लिए आत्महत्या (Honor Suicides in Japan)Hindi, News, Story, History, Kahani, Itihas, Methods of Human Sacrifice, Narbali, Ancient tradition of narbali in Hindi,
जापान में एक रिवाज बहुत लम्बे समय तक चला था जिसे ‘सेप्पुकु’ कहते थे. यह ‘बुशीदो’ (योद्धाओं का तरीका) का ही एक रूप था। यह एक तरह की आत्महत्या ही होती थी, जिसमें योद्धा को खुद को काटना होता था। इस परंपरा को निभाने के बहुत सारे कारण थे, जैसे किसी व्यक्ति का सम्मान खो देना। यदि यह सेप्पुकु पहले से निश्चित होता था तो एक समुराई को नहला-धुला कर सफेद कपड़ों में तैयार कर दिया जाता था।
उसे उसका मनपसंद खाना खिलाया जाता था और उसके हथियार (एक स्पेशल चाकू या छोटी तलवार) उसके पास रख दी जाती थी। इसके बाद योद्धा अपनी मौत की कविता बनाता था। जब वह यह सब कर लेता था तो अपने कपड़े उतारता था और हथियार उठाकर अपनी आंते काट कर निकाल देता था। इसके बाद वह एक दूसरा हथियार ‘कैशाकुनिन’ उठाता था और अपनी गर्दन काट कर जिंदगी खत्म कर लेता था।
3- विधवा महिला की गला दबा कर हत्या  (Widow Strangling in Fiji)Widow Strangling in Fiji
फिजी में जिस पल ही एक महिला विधवा होती थी, उसी पल गला घोंट के उसकी हत्या कर दी जाती थी। जिससे उसे मृत पति के साथ दफनाया जा सके. महान मुखियाओं के मामले में उनकी सभी छोटी पत्नियों को गला दबा के मार दिया जाता था। यह महिलाएं कब्र में कारपेट की तरह बिछाई जाती थीं। सबसे ज्यादा दिल दहलाने वाली बात यह थी कि महिला का भाई खुद उसका गला दबाता था.
4. रोते हुए जिंदा बच्चे की चमड़ी उधेड़ना (Weeping Boys, Skinned Alive)Weeping Boys, Skinned Alive
‘आजटेक्स’ अपने बहुत सारी बलि देने के रिवाजों के कारण कुख्यात था। इनमें से एक था जिन्दा इंसान का दिल निकाल कर सूर्य देवता ‘हुइत्जिलोपोत्चली’ को अर्पित करना. हालांकि आजटेक्स कुछ अन्य प्रकार की बलि भी देते थे, जैसे एक व्यक्ति को ‘ट्लालोक’, ‘सीपे टोटेक’ और धरती मां ‘टेटेओइनन’ को प्रसाद के रूप में दिया जाता था।
ट्लालोक को प्रसाद के लिए एक जिंदा रोते बच्चे की चमड़ी उधेड़ दी जाती थी। सीपे टोटेक के प्रसाद के लिए व्यक्ति को खंभे से बांध पूरे शरीर को बाणों से छलनी किया जाता था। फिर पुजारी द्वारा इंसान की चमड़ी उधेड़ी जाती थी. वहीं ‘धरती मां टेटेओइनन’ में एक उधड़ी चमड़ी की महिला की आवश्यकता होती थी। इन सभी में एक चीज समान होती थी कि इस दौरान अनगिनत लोगों को बलि के लिए चुन लिया जाता था।
5- ड्रूड्स के द्वारा जिंदा जला देना (Burned Alive by Druids)15
रोमन सभ्यता से पहले के कई ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं जिसमें सेल्टिक ड्रूड्स के द्वारा लोगों की बलि दी जाती थी। सीजर ने भी कहा था कि नौकर, और उन सभी लोगों को जो हाई रैंकिंग गौल्स पर आश्रित हैं, उन्हें अपने मालिक के मरने पर उन्हीं के साथ जिंदा जला दिया जाए।
दूसरी तरह की बलि फांसी होती थी, जो ‘भगवान इसस’ के लिए थी। तीसरी थी पानी में डुबाके मारना, जो ट्यूटेट्स के लिए दी जाती थी। लेकिन, ड्रूड्स द्वारा बलि का तरीका सबसे ज्यादा प्रयोग में आता था और वह था ‘विकर मैन’। इसमें लकड़ियों से बड़े आदमी के आकार का ढांचा बनाया जाता था और फिर उसमें जिंदा इंसान को बैठा कर जला दिया जाता था।
6- आर्किटेक्चर के नाम (In the Name of Architecture)16
हालांकि पुराने समय में चीन में बलि प्राचीन देवताओं को खुश करने के लिए दी जाती थीं, लेकिन इमारतों को मजबूती देने के लिए बलि का चलन ज्यादा था. इसका एक बहुत ही लोकप्रिय उदाहरण टी साई के राजकुमार की बलि थी जो एक युद्ध के दौरान पकड़ा गए थे। इस युद्ध में उसके पूरे साम्राज्य का नाश हो गया था। उसकी बली एक बांध को मजबूती प्रदान करने के लिए दी गई.
7- विश्वास की छलांग- या किसी ‘माया’ ने उसे धक्का दिया? (Leaps of Faith – or Did the Mayans Push Them?)17
‘माया’ दैवीय शक्ति में दृढ़ विश्वास रखते थे, जो उनके अनुसार चूना पत्थर के बीच बनी खाई की गहराई में होती थी। इस खाई को वे लोग सिनोट कहते थे। उनका विश्वास था कि इसमें एक पाताल लोक का प्रवेश द्वार होता है, जो उनके अपने लोगों को वहां पहुंचाता है। उन्हें विश्वास था कि इस सिनोट में जिसे भी फेंका जाएगा वह मरेगा नहीं।
8- रूमाल वाले ठग (Thugs with Handkerchiefs)18
ठगीस नाम से मशहूर ‘ठग’ भारत में कट्टर धार्मिक समूह था। यह समूह कर्मकांडों द्वारा काली माता को प्रसन्न करने के लिए हत्याओं के लिए कुख्यात था। यह हत्यारे बंजारों की तरह भारतवर्ष में सैकड़ों सालों तक घूमते रहे। यह न कोई सबूत छोड़ते थे और न ही इनकी पहचान संभव थी। जो उनसे पहली बार मिलता था, वह उनके बारे में जानने वाला आखिरी व्यक्ति होता था। बलि के लिए यह राहगीरों के साथ दोस्ती करते थे और रात में मौका पाते ही पीले रूमाल या फंदे से उनका गला घोंट देते थे। शव को उनके घर से दूर कहीं दफना दिया जाता था।
9- उपहार देना और कत्ल कर देना (Gift-Giving and Decapitation)19
पश्चिमी अफ्रीका में ‘दाहोमी’ (आज का घाना) नामक जगह थी। यहां बड़ा उत्सव मनाया जाता था, जिसमें नेताओं के बीच उपहार लेने-देने को लेकर चर्चा होती थी।  इसके साथ ही, इसमें बहुत सारी बलियां भी दी जाती थीं।
इसमें सबसे ज्यादा मरने वालों की तादाद नौकरों, युद्ध बंदियों और अपराधियों की होती थीं। यहां बलि देने का तरीका कत्ल के समान होता था। इस ‘एक्जवेटानू’ नाम के उत्सव में बहुत सारे कत्ल कर दिए जाते थे।
10. जिंदा दफनाना (Buried Alive)20
प्राचीन काल में मिस्र की फेरो सभ्यता में राजा को ‘फेरो’ कहा जाता था। जब फेरो (राजा) मरता था, तो उसे उसके जिंदा नौकरों के साथ जमीन में दफनाया जाता था। माना जाता था कि यह सारे नौकर राजा के मरने के बाद, उसकी सेवा करेंगे. कुछ पुरातत्वविदों का यह भी मानना है कि जब नौकरों को दफनाया जाता था. तब उन्हें कोई दवा दी जाती थी, जिससे वे अपने ऊपर नियंत्रण खो देते थे.

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