पिरामिड से जुडी ये बातें नहीं है सही, जाने क्या है हकीकत

मध्यकालीन 7 अजूबों में से एक मिस्र के पिरामिड्स धरती की सबसे रहस्यमयी
चीज़ों में शुमार हैं। हर साल करोड़ों लोग इन्हें देखने आते हैं। 4,500 साल
पहले बनाए गए इन पिरामिड्स पर हजारों रिसर्च हो चुकी हैं, तरह-तरह के
साइंटिफिक टेस्ट हो चुके हैं। इसके बावजूद पिरामिड्स के बारे में बहुत सारे
गलत फैक्ट्स भी चल रहे हैं। आइए जानते है कुछ ऐसी ही बातें –
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एलियंस ने नहीं बनाए थे पिरामिड्स
बहुत सारे लोग अब भी मानते हैं कि इतने विशाल पिरामिड्स को बनाना धरती के
इंसानों के बस की बात नहीं रही होगी। इन्हें बनाने में एलियंस ने मदद की
होगी। इन पिरामिड्स में 2 टन तक भारी पत्थरों का इस्तेमाल हुआ है। आज
मॉडर्न टेक्नोलॉजी के बावजूद इतने विशाल पिरामिड बनाना मुश्किल ही होगा।
बावजूद इसके सच यह है कि पिरामिड्स को इंसानों ने ही बनाया था। पिरामिड्स
में एलियंस की कोई निशानी नहीं मिली है, जबकि इंसानों की कई तरह की चीजें
और अवशेष मिले हैं। माना जाता है कि पिरामिड्स के कंस्ट्रक्शन में 1 लाख
लोग लगे थे।

गुलामों ने नहीं बनाए पिरामिड्स
मिस्र के पिरामिड्स के बारे में माना जाता है कि इन्हें गुलामों से
जबरदस्ती बनवाया गया था। लेकिन कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन्हें बनाने
वाले गुलाम न होकर स्किल्ड इंजीनियर और श्रमिक थे। पिरामिड्स के निर्माण के
दौरान कई मजदूरों की मौत भी होती थी, जिन्हें आसपास ही सम्मानजनक ढंग से
दफनाया जाता था। 2014 में आई हॉलीवुड मूवी ‘एक्सोडस’ को इजिप्ट की सरकार ने
बैन कर दिया था, क्योंकि इसमें दिखाया गया था कि पिरामिड्स यहूदी गुलामों
ने बनाए थे।
उजाड़ रेगिस्तान में नहीं हैं पिरामिड्स
तस्वीरों में पिरामिड्स के आसपास रेत देखने से लगता है कि ये उजाड़
रेगिस्तान में बनाए गए हैं। लेकिन सच तो यह है कि बहुत सारे पिरामिड्स
इंसानी बसाहट के बीच हैं। ग्रेट पिरामिड ऑफ गीजा भी मिस्र की राजधानी
काहिरा के पास है। यह गीजा नामक प्राचीन शहर में स्थित है, जो अब मेट्रो
सिटी काहिरा से जुड़ चुका है।

ग्रेट पिरामिड ऑफ गीजा नहीं है सबसे बड़ा
गीजा के पिरामिड को उसकी विशालता के कारण ग्रेट कहा जाता है। लेकिन नई
डिस्कवरीज बताती हैं कि यह दुनिया का सबसे बड़ा पिरामिड नहीं है। यह दर्जा
मैक्सिको के चोलुला पिरामिड के पास है। पहली नजर में ग्रेट पिरामिड ऑफ
चोलुला एक पहाड़ की तरह लगता है। इसका निर्माण ईसा से 200 साल पहले एज्टेक
लोगों ने शुरू किया था, जो नवीं सदी तक चलता रहा। यह 66 मीटर ऊंचा और 450
बाय 450 मीटर लंबा-चौड़ा है। अलबत्ता गीजा का पिरामिड सबसे ऊंचा जरूर है।
इसकी ऊंचाई 139 मीटर है।
अटलांटिस सभ्यता का नहीं है यह काम
वेस्टर्न वर्ल्ड में माना जाता है कि अटलांटिस एक प्राचीन सभ्यता थी, जिसके
अवशेष समुद्र में डूबे हुए हैं। कुछ स्कॉलर्स का दावा था कि अटलांटिस
लोगों ने ही मिस्र के पिरामिड बनाए हैं। उनके दावे का आधार यह था कि दक्षिण
अमेरिका में भी कुछ पिरामिड पाए गए हैं, जो अटलांटिस लोगों द्वारा बनाए गए
थे। लेकिन सच तो यह है कि दक्षिण अमेरिका और मिस्र के पिरामिड्स की संरचना
और निर्माण शैली में बहुत अंतर है और ये एक तरह के लोगों का काम नहीं हैं।

अनाज के भंडार नहीं थे पिरामिड्स
2016 में रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से अमेरिकी राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने
की दौड़ में बेन कार्सन भी शामिल थे। मीडिया में उनका एक वीडियो वायरल हुआ
था, जिसमें वे कह रहे थे कि पिरामिड्स अनाज का भंडार हुआ करते थे, जिनसे
अकाल के समय मदद मिलती थी। बहुत सारे लोग इस बात में विश्वास रखते हैं।
लेकिन सच तो यह है कि पिरामिड्स में मिस्र के राजाओं (फराओ) के शव रखे जाते
थे।
सब कुछ नहीं है ज्ञात
ऐसा माना जाता है कि हम पिरामिड्स के बारे में सबकुछ जान चुके हैं। सच तो
यह है कि रोज-रोज ही इन पिरामिड्स के बारे में नई-नई डिस्कवरीज हो रही हैं।
मिस्र (इजिप्ट) की सरकार विदेशियों से बहुत सारी बातें छुपाती भी है।
इसलिए पिरामिड्स के बारे में बाहरी दुनिया की जानकारी लिमिटेड ही है। हाल
ही में गीजा के पिरामिड की बगल में खुफु सोलर शिप मिला था। इसके बारे में
हमें ठीक-ठीक जानकारी नहीं है। अनुमान है कि इसमें मिस्र के फराओ (राजा) के
शव रखे जाते थे।

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