इन तांत्रिक साधनाओं से वश में किए जाते है भूत, प्रेत, जिन्न, बेताल और पिशाच

Bhoot, Pret, Jinn, Betal, Pishach Sadhna in Hindi : आज हम आपको सुलेमानी तंत्र (Sulemani Tantra) और हिन्दू तंत्र (Hindu Tantra) की उन साधनाओं के बारे में बता रहे है जिनके बारे में कहा जाता है कि जो इन साधनाओं को साध लेता है उनकी बातें भूत, प्रेत, जिन्न, बेताल और पिशाच भी मानने लगते है। यह बातें हमें सुनने में असंभव लग सकती है पर तंत्र विज्ञान में कुछ भी असंभव नहीं है।
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तंत्र साधना के नियम (Tantra Sadhna Ke Niyam)- सभी साधनाओं के कुछ कॉमन नियम होते है जो इस प्रकार है।

  1. ये सभी साधनाएं एकांत में या किसी विशेष स्थान पर की जाती हैं।
  2. गुरु के बिना इस तरह की साधनाएं नहीं की जाती हैं।
  3. साधना में साफ-सफाई रखना और ब्रह्मचर्य का पालन बहुत जरूरी होता है।
  4. साधना में खुद के हाथों से बना भोजन ही करना होता है।
  5. चमड़े के सामानों का उपयोग करना पूरी तरह वर्जित होता है।
  6. साधना के दौरान मांस, मदिरा व किसी भी तरह का नशा करने पर साधना फलीभूत नहीं होती है।

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जिन्न साधना (Jinn Sadhna)- सुलेमानी तंत्र (Sulemani Tantra) में मुख्य रूप से माना जाता है कि 100 भूत-प्रेतों के बराबर ताकत एक जिन्न में होती है। इसे साध लेने पर ये दिखाई देता है और साधक अपनी इच्छा अनुसार जिन्न से अच्छा या बुरा काम करवा सकता है। वो इस साधना से किसी दूसरे इंसान की व्यक्तिगत चीज़ों की जानकारी भी हासिल कर सकता है।
परी साधना (Pari Sadhna)- सुलेमानी तंत्र (Sulemani Tantra) में ये एक प्रमुख साधना है वैसे तो परी साधना अनेक तरह की होती है, लेकिन शाह परी साधना सबसे बेहतर मानी जाती है। कहा जाता है कि यदि कोई ये साधना कर ले तो शाह परी उसके सामने हाज़िर होती है और उसकी हर इच्छा पूरी करती है। फिर चाहे वो इच्छा धन से जुडी हो या किसी अन्य चीज़ से।
कर्ण पिशाचनी साधना (Karna Pishachini Sadhana)- मान्यता है कि अगर मौत के बाद मुक्ति ना मिले तो आत्मा की क्षमताओं में आश्चर्यजनक वृद्धि हो जाती है। इसलिए ऐसी शक्तियां पाने के लिए पिशाच साधना की जाती है। इस साधना की सिद्धि के बाद किसी भी प्रश्न का उत्तर कोई पिशाचनी कान में आकर देती है। इसे करने वाला इंसान सामने बैठे व्यक्ति की नितांत व्यक्तिगत जानकारी भी बता सकता है।
किंकरी साधना (Kinkari Sadhna)- प्रेत योनि में जाकर जीव कई बार उत्पाती हो जाता है। साधक इसका लाभ उठाते है। इसके लिए अनुष्ठान नहीं करना पड़ता, मन्त्र जाप ही काफी रहता है। ये साधना शव की पिंड पर होती है। इस साधना के सिद्ध होने पर प्रेत आदेश के अनुसार काम करता है।
बेताल साधना (Betal Sadhna)- यह साधना रात में निर्जन स्थान पर की जाती है। इसमें बहुत शक्तिशाली प्रेत यानी बेताल को अपने वश में किया जाता है। इसके लिए बेताल यंत्र व माला का उपयोग किया जाता है। तंत्र की मान्यता है कि इस साधना से जब बेताल प्रसन्न होता है तो वो साधना करने वाले की हर इच्छा को पूरा करता है और उसकी आज्ञा का पालन करता है।
वीर साधना (Veer Sadhna)- वीरों की संख्या 52 बताई गई है। इन्हें भैरव का गण कहा गया है। बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, पंजाब आदि प्रान्तों में वीरों के कई मंदिर है। वीर साधना किसी एकांत स्थान पर की जाती है। कई दिन, कई रातों तक महाकाली की पूजा करने के बाद एक ऐसा क्षण आता है, जब काली के दूत सामने आते है और साधक की मनोकामना पूरी करते है।
डाकिनी साधना (Dakini Sadhna)- तंत्र जगत में डाकिनी का नाम प्रचलित है। ये नाम आते ही एक उग्र भावना दिमाग में आती है। एक भयानक रूप और गुण की महिला की आकृति उभरती है जो पैशाचिक गुण रखती है। वास्तव में ये काली का एक स्वरुप है। यह शक्ति मूलाधार के शिवलिंग का भी आधार है। डाकिनी साधना कर लेने पर साधक इससे अपने सारे काम पूरे करवा सकता है।
नोट-इस तरह की खबर से हमारा उद्देश्य किसी तरह का अंधविश्वास फैलाना नहीं है। हम सिर्फ गुप्त विद्याओं के बारे में जानकारी पाठकों को देना चाहते हैं

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